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शादी का न्यौता... हाथी पर बैठकर
इन दिनों खजराना में नायता समाज शादी का बुलौवा देने घर-घर जाते हैं, जिन्हें यहां फकीर (न्योतिया) कहा जाता है। पूरी बिरादरी है और बरसों से यही काम कर रही है, लेकिन अब ठाठ-बाठ हो गए हैं। पहले नाम गिना दिए जाते थे कि कहां, किस तरह देना है। पूरे गांव को बोलकर आ जाते थे, लेकिन अब घोड़ा, बग्घी, हाथी, बैंड हैं। मोहसिन पटेल की लड़कियों की शादी है, तो उन्होंने न्योतिया को ढोलक और बैंड के साथ रवाना किया। इसे टीक कहा जाता है और लगन भी कह सकते हैं, जो लड़के के घर जाता है और उनसे कहा जाता है कि कब बारात लेकर आना है। इसमें परिवार वाले नहीं जाते हैं, काम के लिए जो तय हैं, उन्हें ही भेजा जाता है। अभी खजराना में राशिद शाह और रमजान शाह इस काम को कर रहे हैं। ढोल-धमाके और बैंड के साथ जब वो लड़के वालों के घर पहुंचे, तो भरपूर इस्तकबाल हुआ। ग्यारह-ग्यारह हजार रुपये के लिफाफे थे। कपड़े दिए गए। खूब खातिर-तवाजो हुई और खजराना में सिलसिला शुरू हो गया। इस्लाम पटेल तो आठ कदम आगे निकल गए हैं। उन्होंने हाथी पर राशिद शाह को बैठा दिया। सात घोड़े थे, सात बैंड वाले और खूब आतिशबाजी की गई। राशिद शाह को शेरवानी पहनाकर राजा-रजवाड़ों की तरह भेजा गया। खूब आवभगत हुई। बारात निकलने और बाना घूमने से पहले शाह को निहाल कर दिया था। बात सिर्फ मोहसिन पटेल और इस्लाम पटेल की नहीं, कई ऐसा कर रहे हैं। कोई शेरवानी सिलवा रहा है, कोई कपड़े