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मुंह छुपाकर बहस, नेमार पर रोक

मुंह छुपाकर बहस, नेमार पर रोक

नई दिल्ली। ब्राजीलियन चैंपिनयशिप के दौरान विरोधी खिलाड़ी से बहस के वक्त मुहं छुपाकर बहस के मामले में स्टार फुटबॉल नेमार पर दो मैच का बेन लग गया है। ब्राजील में मुंह छुपाकर बहस करने पर विनीसियस कानून लागू होता है। यह उनके ही साथी खिलाड़ी विनीसियस जूनियर के नाम पर है। विनीसियस ने साथी खिलाड़ी पर नस्लीय टिप्पणी के आरोप लगाए थे, तब उसने टी-शर्ट से मुंह छुपा रखा था। तब से ही नियम है। सैंटोस और बाहिया के खिलाफ हुए मैच में नेमार ने विनीसियस लॉ तोड़ा और कार्रवाई हो गई।

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ये बाज की आंख है...!

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ये बाज की आंख है...!

अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, तिलक वर्मा न्यू जीलैंड गेंदबाजों को धुन रहे हैं, लेकिन कप्तान मिचेल सैंटनर की तरफ कोई नहीं लपक रहा। तीन मैच में सात विकेट चटकाए हैं और औसत सात ही है, नहीं तो पिछले मुकाबले में कुछ गेंदबाजों के बाईस थे। सैंटनर दुनिया के उन बिरले उलटे हाथ के स्पिनर में हैं, जिनके आगे उलटे हाथ का बल्लेबाज भी बेबस रहता है। इसके पीछे वार्न, मुरली जैसी टर्न नहीं, बल्कि चश्मे के पीछे छिपी आंखें हैं। सैंटनर का चेहरा पढऩा सबसे मुश्किल काम है और उससे भी मुश्किल आंखें, जबकि रन-अप में पहला कदम बढ़ाते ही बल्लेबाज को पढऩा शुरू कर देते हैं। जॉग करते हुए आते हैं, लेकिन गेंद फैंकने से पहले हल्का सा रुकते हैं, जैसे फुटबॅाल में पेनल्टी लेते वक्त खिलाड़ी किक से ठीक पहले वक्त लेता है गोलकीपर की चाल समझने के लिए। इसी पॉज में सैंटनर समझ जाते हैं कि बल्लेबाज क्या करने वाला है। सैंटनर की यह चाल इतनी कामयाब है कि पिच की मदद मायने नहीं रहती। इसलिए कभी-कभी उन्हें फुलटॉस गेंद पर भी विकेट मिल जाते हैं और कभी गेंद इतनी धीमी फैंक देते हैं कि बल्लेबाज सिर पर ही गेंद खड़ी कर देता है। मिशेल सैंटनर क्रिकेटर नहीं होते तो पक्का दिमाग पढ़ने वाले डॉक्टर होते। भारत पर उलटे हाथ के गेंदबाज हावी हो रहे थे, इसलिए कोच गौतम गंभीर उलटों को लेकर आ गए, पर इसका सैंटनर पर फर्क नहीं पड़ा। 2024 की टेस्ट सीरिज से ही तंग कर

बल्ला सिर के ऊपर, गेंदबाज मैदान के बाहर...!

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बल्ला सिर के ऊपर, गेंदबाज मैदान के बाहर...!

इस साल टीम इंडिया ने सबसे ज्यादा छक्के लगाए हैं और मारे किसने हैं, वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन ने। इनमें संजू की कलाईयां ही मजबूत दिखती हैं और वजन में भी भारी हैं। वैभव पंद्रह के हैं तो अभिषेक के चेहरे से टपक रही मासूमियत देख लगता नहीं इतने क्रूर होंगे, लेकिन इन्होंने छक्के मारना बच्चों का खेल बना दिया है। अपने मेडिटेशन के लिए गेंदबाजों की मेंटल हेल्थ खराब कर रहे हैं। क्रिस गेल, पोलार्ड, एबी डीविलियर्स, डेविड मिलर और ब्रेंडन मैक्कुलम की मार देख चुके हैं, पर इतने प्रेम से कोई बखिया नहीं उधेड़ता, जितनी कि अभिषेक एंड कंपनी। ना तो क्रीज में घुसकर खड़े होते हैं, ना शरीर कडक़ कर टकटकी लगाते हैं और ना ही आड़े-तिरछे और पीछे मारने वाले शॉट का सहारा लेते हैं। जिस स्टांस में गेंद नीचे मारने के लिए खड़े होना चाहिए, उसी में सीधे बच्चे की तरह खड़े हो जाते हैं, लेकिन जैसे ही बैकलिफ्ट सिर के ऊपर जाती है तो ऐसा स्विंग बनाती है कि गेंद में हवा में उड़ती हुई दूर जाकर गिरती है। इन लडक़ों में सीखने की ललक भी गजब है। पिछली सीरिज में अभिषेक को रोस्टन चेस ने फंसाया तो समझ गए कि स्पिन के खिलाफ बल्ला नहीं ले जाना है, उसी के साथ मारना है और यह कोई नया विज्ञान नहीं है। अभिषेक ने तुरंत बल्लेबाजी में लाए और ब्रेसवेल को सामने और कवर्स के ऊपर मार भूत बना दिया। तीनों मैच में भारत ने रनों का पीछा किया

सत्तर गोल का इनाम...पच्चीस साल बाद ब्रिटिश खिलाड़ी को मिला

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सत्तर गोल का इनाम...पच्चीस साल बाद ब्रिटिश खिलाड़ी को मिला

लंदन। यहां के ऐतिहासिक पैलेडियम थियटर में सत्तरवें बैलें डी-ऑर अवार्ड की शाम सजी थी, जिसमें पच्चीस साल बाद अंग्रेज खिलाड़ी को यह अवार्ड दिया गया। आखिरी दफा माइकल ओवेन (2001) को ट्रॉफी मिली थी। केन ने इस रेस में किलियन एमबापे, लामिन यमाल और रोड्री को पीछे छोड़ा है। लियोनल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो टॉप-टेन में भी नहीं थे। पिछला सीजन केन के गजब रहा है। बायर्न म्यूनिख और इंग्लैंड के लिए खेलते हुए गोलों की बरसात कर दी। 73 गोल दागे। जर्मन फुटबॉल में धाक जमाते हुए बायर्न को बुंडेसलीगा और जर्मन कप का डबल खिताब जिताया। विश्वकप में भी केन का जादू बरकरार रहा। इंग्लैंड को सेमीफाइनल तक ले जाने वाले केन टूर्नामेंट में 6 गोल दागे थे। महान फुटबॉलर गैरी लिनेकर को पीछे छोड़ते हुए विश्व कप इतिहास में इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा गोल करने का रिकॉर्ड बनाया। पहली बार अवार्ड समारोह लंदन में हो रहा है, जबकि पहला बैलें डि-ऑर 1956 में इंग्लैंड के ही खिलाड़ी स्टेनली मैथ्यूज को दिया गया था। उन्हीं के सम्मान में समारोह रखा गया और केन को खिताब मिला। महिलाओं की ट्रॉफी पर एलेक्सिया पुतेलास ने हाथ मारा है। स्पेन की करिश्माई मिडफील्डर ने तीसरी बार महिला बैलें डी-ऑर खिताब जीता है। लगातार तीन बार से अवॉर्ड जीतने वाली ऐताना बोनमाती की चोट ने पुतेलास को ट्रॉफी पर फिर झपट्टा मारने का मौका दिया। यमाल को बैलें डि-ऑर का

कमजोरी को ताकत बनाती है...!

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कमजोरी को ताकत बनाती है...!

सूमो सबसे कम समय का खेल है। इसे खेलने में बरसों की मेहनत है। बायोपिक ‘सूमो दीदी’ (जी-5) में किसी खिलाड़ी की ट्रेनिंग के साथ-साथ सामाजिक और पारिवारिक संघर्षों को भी दिखाया है। वर्ल्ड (2009) के वर्ल्ड गेम्स में मिडिलवेट कैटेगरी में पांचवें स्थान पर आईं प्रोफेशनल सूमो रेसलर हेतल दवे ने भारत का नाम रोशन किया था। उनके ही जीवन पर है। किरदार निभाने वाली श्रीयम भगनानी ने सहज और दमदार अभिनय से जान डाल दी है। यह कहानी खेल में मिले पहले पदक की तरह ही कीमती है। महिलाओं की ताकत को ‘सांस्कृतिक कमजोरी’ मान लिया जाता है। सूमो में कोई बड़ा नाटकीय मोड़ (क्लाइमैक्स) नहीं है। इसलिए, जब हेतल के पिता प्रोजेक्टर पर पूरे मोहल्ले को मैच दिखाने का मन बनाते हैं, तो राहगीर पूछ लेता है कि क्या क्रिकेट मैच है? इस बात को बखूबी दिखाती है कि एक मिनट की जीत या हार के पीछे कड़ी मेहनत और ट्रेनिंग है। भले ही इसके संवाद थोड़े सीधे और साफ हैं, लेकिन लेखनी आमने-सामने के मुकाबले में छिपे नारीवाद को अच्छे से पेश करती है। महिलाओं के फैसले खुद लेने के अधिकार और ‘बॉडी पॉजिटिविटी’ यानी अपने शरीर को अपनाने पर जोर देना अच्छी सोच है। यह संदेश कई बार ऐसी बातचीत के जरिए दिया जाता है, जो स्वाभाविक संवाद के बजाय किसी घोषणा जैसा लगता है। फिर भी हेतल की जिंदगी मोटे शरीर को स्वीकार करने की मजबूत मिसाल है। कहानी हेतल के स्कूली दिनों में

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'न चुनना ही सबसे खतरनाक है...!'

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'न चुनना ही सबसे खतरनाक है...!'

लगता हैं प्रगतिशील लेखक संघ की प्रगति रुक रही हैं..! शायद इसीलिए प्रलेस के सम्मेलन का दूसरा दिन पहले जैसा नहीं था...! पहला दिन देश की चिंता पर था और वो बातें हुई थी जो हर आम ओ खास को सुनना चाहिए थी। दूसरे दिन मायूस हुए कि प्रलेस में उभरते ‘वैचारिक घालमेल’ और ‘भरोसे’ पर था, लगता हैं प्रलेस में अब पहले जैसे वैचारिक मजबूत लोग नहीं आ रहे हैं, जो आ रहे हैं वे दूसरे विचारों से भी जुड़े रहते हैं या ये भी हो सकता हैं कि वे लेखक बनने के लिए या लेखनी को मजबूत करने क लिए प्रलेस में आते हैं। इसी के आसपास बातें हुई, जिसमें राकेश वानखेड़े ने अच्छा कहा, ‘‘हमें यहां किसी ने थोपा नहीं हैं, हम अपनी मर्जी से आए हैं, हमें दोहरा चरित्र नहीं रखना चाहिए, आर्य समाज, ब्रह्म समाज, प्रार्थना समाज, सत्यशोधक समाज आंदोलन ये सब खुद को प्रगतिशील मानते थे, लेकिन ये सब एक ही पेट में चले गए हैं। लीबरल होना बहुत खतरनाक हैं, आप अच्छाई या बुराई में से एक चुनो, न चुनना बहुत खतरनाक हैं। हम जिस माहौल से आते हैं,वो माहौल हमें असमानता, भाषा के नाम पर लड़वाना सिखाता हैं, हमें ताक़त ही नहीं देता कि हम लाखों लोगों के सामने खड़े होकर सत्य कह सके। अगर हमें अच्छा लेखक बनना हैं तो उस दायरे से बाहर निकलना होगा।’’ यहाँ से वे कम्युनिज्म में दूसरे विचारों के मेल की तरफ इशारा करते हैं और सवाल भी उठाते हैं। वे कहते हैं कि नेहरू- गाँधी,

तिलक + नीतिश + नमन = हार्दिक

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तिलक + नीतिश + नमन = हार्दिक

बीच के ओवर में बल्लेबाजी, अंत में फिनिश, नई गेंद फैंकना और डेथ ओवर में बचके निकलना, यह सभी काम अकेले हार्दिक पंड्या आसानी से कर लेते हैं, लेकिन शरीर इतना मजबूत नहीं है कि सभी काम झेल सके। फिट हार्दिक का इंतजार कोच गौतम गंभीर ने खूब किया, लेकिन समझ गए कि आस लगाने से बेहतर है कि आगे बढ़ा जाए। नतीजा यह निकला कि तीन खिलाड़ियों ने मिल कमी पूरी कर दी है। तिलक वर्मा बीच के ओवरों में संभालना जानते हैं, नमन धीर आते ही छक्के लगा देते हैं तो नीतिश कुमार रेड्डी और धीर गेंदबाजी में मिल ओवर निकाल देते हैं। वर्मा पहले ही साबित कर चुके हैं कि उनमें मैच खत्म करने के गुण है। गेंद के पीछे ताकत लगाने के बजाए गैप ढूंढने पर भरोसा रखते हैं और जैसे ही मुश्किल वक्त आता है, चट्टान की तरह खड़े हो जाते हैं। वर्मा के लिए तो हार्दिक ही कह चुके हैं कि इतनी काबिलियत है कि गेंद को सिर्फ देखने की जरूरत है, शॉट तो अपने आप लगा देंगे। रेड्डी ने गेंदबाजी सुधारी है। पहले एक जैसी गेंद फैंकते थे, लेकिन अब हार्ड लैंग्थ पर हिट कर पा रहे हैं। रेड्डी में हार्दिक जैसी चतुराई नहीं है। हार्दिक माहौल के हिसाब से खुद को बदलने में माहिर हैं। नई गेंद से गेंदे भी फैंक लेते हैं तो पुरानी से कटर और यॉर्कर से ओवर निकाल देते हैं। रेड्डी पर अभी ज्यादा भार डालने की जरूरत नहीं है। रही बात बल्लेबाजी की तो धीरे-धीरे वो भी जोर पकड़ रही है। नमन

यंग से है... जंग!

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यंग से है... जंग!

जापान ओपन के बाद पीवी सिंधू फिर खिताब के करीब हैं, लेकिन इस दफा आड़े दुनिया की वो खिलाड़ी है, जिसे अजेय रहने की आदत है। सिंधु से आन से यंग के दस मुकाबले हुए हैं और दस में ही सिंधू को हार मिली है। बेहतरीन लय में हैं। सिंधू का कहना है कि मिथक तोड़ देंगी। इस पर भरोसा कम है, लेकिन करने के अलावा चारा नहीं है। सिंधू के खेल में जबर्दस्त सुधार हुआ है। पहले की तरह क्रॉसकोर्ट स्मैश के सहारे नहीं रहतीं, स्मैश लगाने लगी हैं। हाफ स्मैश को ड्रॉप शॉट में बदल दिया है। दोपहर साढ़े तीन बजे मुकाबला है। टीवी नहीं दिखाएगा। फैनकोड एप पर जाना पड़ेगा।

जेब में रखा मैच, फिसल गया !

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जेब में रखा मैच, फिसल गया !

न्यूजीलैंड ने भारत को 112/6 पर समेटकर जीत लगभग जेब में रख ली थी, पर आखिरी पांच ओवर में 68 रन लुटाकर जेब कटवा ली। विकेट लेना हुनर है, पर दबाव में मैच बचाना असली इम्तिहान, जिसमें कीवी कप्तान और गेंदबाज फेल हुए। भारतीय गेंदबाजों ने पावरप्ले में 43 रन पर तीन विकेट निकालकर मेजबानों को बैकफुट पर धकेल दिया था। हागले ओवल की पिच पिछले मैच से धीमी थी, गेंद रुककर आ रही थी। ऐसे में ग्लेन फिलिप्स (43 गेंदों पर 70) और बेवन जैकब्स (46 गेंदों पर 58) ने चौथे विकेट के लिए 116 रन जोड़कर न्यूजीलैंड को 180/5 के मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। सेंटनर ने चार ओवर में 21 रन देकर चार विकेट झटके। अंतिम पांच ओवर में 68 रन चाहिए थे। कीवियों को बस अपनी लाइन-लेंथ और फील्डिंग पर भरोसा रखना। तिलक वर्मा की यही खूबी है कि यदि शुरू में आउट नहीं ,,तो फिर भूल जाइए ,पूरे दिन खेल सकते हैं .चढ़ते सूरज की तरह खेल है उनका .पहले धीमे और फिर धुंआधार (नाबाद 51, 26 गेंद) . नीतीश कुमार रेड्डी (नाबाद 26, 13 गेंद) ने सातवें विकेट के लिए 30 गेंदों में 69 रन कूट डाले। तिलक ने नाथन स्मिथ के 18वें ओवर में 20 रन बटोरे। फिलिप्स का मिसफील्ड और जैकब डफी की नो-बॉल पर मिला जीवनदान भारी पड़ा। डफी ने 3.5 ओवर में 41 और फर्ग्यूसन ने 3 ओवर में 37 रन लुटाए। सेंटनर की सोच बीच के ओवरों में धारदार थी, पर आखिरी ओवर में यॉर्कर गायब रहीं। कप्तान योजना बदलने औ

किराये की राइफल से सोना जीत लिया

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किराये की राइफल से सोना जीत लिया

दस मीटर एयर राइफल में सोना जीतने वालीं मोना अग्रवाल ने पचास मीटर एयर राइफल में विश्व रिकॉर्ड के साथ पैरा एशियन गेम्स का दूसरा सोना जीत लिया। पांच साल पहले निशानेबाजी चुनने वालीं मोना ने दस मीटर एयर राइफल इसलिए चुनी की एकेडमी पास ही थी। दो साल तैयारी के बाद पचास मीटर में भी हाथ आजमाने की सोची। किराए की राइफल ली और तीस किलोमीटर स्कूटी से अभ्यास के लिए जाने लगीं। दूर की वजह से हफ्ते में तीन दिन ही जातीं, लेकिन दोनों में महारत हासिल कर ली। चार महीना पहले मोना ने खुद की राइफल खरीदी, लेकिन जापान आने से पहले उसमें खराबी आ गई। फिर से किराए की राइफल ली और ऐसा निशाना साधा कि दूसरे सोने के साथ विश्व रिकॉर्ड भी बना दिया। पचास मीटर 3पी में घुटने के बल, पेट के बल भी निशाना लगाना पड़ता हैं। बोलीं कि पहले कई दिनों तक दर्द होता था, लेकिन टे्रनिंग के बाद ताकत आई तो खड़े होकर निशाना भी सुधर गया।

लाल गेंद से... पटिए उलाल!

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लाल गेंद से... पटिए उलाल!

लिंकन। फटाफट क्रिकेट में तो भारत ने न्यू जीलैंड को पहले मुकाबले में पटक दिया, लेकिन लाल गेंद में भारत-ए का वो हाल किया है कि सौ रन बनाने में दस विकेट चले गए। केएल राहुल और साइ सुदर्शन तो खाता भी नहीं खोल पाए। यशस्वी जायसवाल ने 17 और भारत के नए नंबर तीन देवदत्त पडिक्कल ने 32 रन बनाए। पांच बल्लेबाजों का शून्य नहीं टूटा। यश राठौड़ 44 रन पर नाबाद रहे। टीम इंडिया 113 रन पर सिमट गई है। सिमोन कीनी ने पांच को चलता किया तो तीन की हालत जैक गिब्सन ने खराब कर दी। एक-एक विकेट फ्रेजर शीट और क्रिस्टन क्लार्क ने बांट लिया। चाय का वक्त हो गया है। न्यू जीलैंड ने बिना विकेट 32 रन बना लिए हैं। अंशुल कंबोज, आकाश दीप और आखिब नबी की जोड़ी नई गेंद से काम नहीं दिखा पाई है। न्यू जीलैंड सीरिज से भारत का विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल तक पहुंचने का मुश्किल सफर शुरू हो रहा है। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया से घर पर भिड़ना है, लेकिन पहले न्यू जीलैंड में कमाल दिखाना पड़ेगा। ग्यारह के दावेदारों को पहले ए टीम के साथ भेजा, लेकिन तैयारी कमजोर दिखी है। यशस्वी जायसवाल को तो वन-डे टीम से दूर कर दिया कि टेस्ट की तैयारी पर फर्क नहीं पड़े।

आज तो सोना-चांदी बरस रहा...

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आज तो सोना-चांदी बरस रहा...

टीम इंडिया की जीत से ज्यादा चर्चा इस बात की है कि न्यू जीलैंड की इंटरनेशनल पिच पर गेंदबाजी का ऐसा जनाज़ा क्यों निकला! जब पांचों भारतीय गेंदबाज दस से ऊपर रन दे रहे तो समझो कप्तान का तरकश खाली था। फिलिप्स की तारीफ बनती है, पर हमारे गेंदबाजों ने भी उन्हें ऐसे चौके-छक्के परोसे जैसे फिलिप्स ससुराल में दावत उड़ा रहे हों। यहां टीम और कप्तानी पर भी सवाल है। क्या गेंदबाज़ों का चुनाव पिच और विपक्षी बल्लेबाज़ों को ध्यान में रखकर किया था? जब रन बरस रहे थे, तब कप्तान ने फील्डिंग में बदलाव और गेंदबाज़ों के इस्तेमाल में क्या नया किया? हर गेंदबाज़ का पिटना उसकी गलती नहीं, कैप्टन की परीक्षा भी है। बीच में विकेट गिरे तो मैच में जान आई, पर नमन धीर ने साबित कर दिया कि असली खिलाड़ी वही है, जो मौके पर चौका मारे। कीवी गेंदबाजी भी गली क्रिकेट से ऊपर नहीं उठ पाई। अजीब बात यह है कि कसी ग ेंदबाजी कर रहे नेथन स्मिथ को सिर्फ दो ओवर थमाए -साफ है, कीवी कप्तान का दिमाग कैच लेते समय गिरने से डगमगा गया था! फील्डिंग में भी कीवियों को हाथ-पाँव खुल नहीं रहे! टी-20 में ढीली फील्डिंग और गेंदबाज़ी की गलतियाँ बने-बनाए मैच का कचूमर निकाल देती हैं। टी-20 में बड़ा स्कोर दरअसल बड़ा मुगालता है, असली जंग तो डेथ अवर्स और फील्डिंग पर जीती जाती है। रन उन्होंने बनाए, बाजी हम ले उड़े!

आज तो सोना-चांदी बरस रहा...

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आज तो सोना-चांदी बरस रहा...

पैरा एशियन गेम्स में सुबह से पदकों की झड़ी लगी है। भारत ने चार सोने के तमगे जीत लिए हैं। बैडमिंटन में कमाल दिखाया है। शुरुआत तीरंदाजी से हुई। हरविंदर सिंह और विजय सुंडी ने डबल्स रिकर्व में चीन को 5-1 से हरा सोना जीत लिया। भावना और पूजा को महिला डबल्स रिकर्व चांदी मिली। बैडमिंटन में दो सोने के तमगे हाथ लगे हैं। नवीन शिवकुमार ने इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान को 36 मिनट में 21-9, 21-17 से हरा दिया। प्रमोद भगत और नितेश कुमार में भी सोने की जंग हुई, पर इस बार बाजी नितेश के हाथ लगी। प्रमोद को 21-18, 21-16 से हरा दिया। नित्या श्री और तुलसिमती मुरुगेसन को चांदी मिली है। संदीप ने 400 मीटर में विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए सोना जीता है। 52.28 सेकंड का समय लिया। अजय कुमार को कांसा मिला। प्रमोद ने 1500 मीटर दौड़ में चांदी जीती। पदक का रंग बदल नहीं पाए। लॉन्ग जंप निमिषा ने 5.37 मीटर की छलांग के साथ चांदी जीती।

कल डंका था... भारत के नाम का!

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कल डंका था... भारत के नाम का!

गुरुवार कमाल बीता है। जम्मू कश्मीर की उन्नीस साला शीतल देवी ने पैरा एशियन गेम्स में दो घंटे में दो सोने के तमगे जीत लिए तो रात में खबर आई कि अनाहत सिंह ने आठ बार की चैंपियन को हरा दिया है। इस बीच अश्मिता चलीहा ने अकाने यामागुची को चित कर दिया। नमन धीर की पारी ने इस पर तडक़ा लगा दिया। शीतल की गोल्डन हैट-ट्रिक हो जाती, पायल नाग के साथ डबल्स में सोना चूक गईं। सिंगल्स में मुकाबला कड़ा था, लेकिन छह लगातार दस के स्कोर ने सोना गले में डाल दिया। मिक्स्ड डबल्स में भी वही काम किया। पेरिस ओलिंपिक में कांसा जीतने के बाद इस तीरंदाज का तोड़ नहीं है। पैरों से इतना सटीक निशाना लगाती हैं कि हमारे धनुर्धर हैरान रह जाएं। अनाहत सिंह ने एशियन गेम्स में सतोमी वतानबे को हराया था तो जिंदगी की सबसे बड़ी जीत करार दी थी। नूर अल शेरबिनी को मात दी तो बोलने के लिए शब्द नहीं थे। आठ बार की विश्व चैंपियन को अठारह साल की अनाहत ने यूं चित कर दिया, जैसे रोज का काम हो। अनाहत कहती हैं कि शेरबिनी को देख कर ही बड़ी हुई हूं। एक मुकाबला नहीं छोड़ा। साथ खेलने को ही खुशनसीबी समझी थी, लेकिन सोचा नहीं था कि हीरो को हरा दू्ंगी। दोनों के कोच ग्रेगरी गॉल्टियर हैं, लेकिन उन्हें भी यकीन नहीं हो रहा कि अनाहत, शेरबिनी पर भारी पड़ी हैं। अनाहत वाला कमाल अश्मिता ने भी दोहराया है। यामागुची को जीत-मशीन कहते हैं। आन से-यंग ही उन्हें हरा सक

जाफर की टाइमिंग फिर खराब...!

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जाफर की टाइमिंग फिर खराब...!

वसीम जाफर घरेलु क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं, लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट में कमाल दोहरा नहीं पाए। जाफर के बारे में कहते हैं कि अमोल मजूमदार की तरह गलत वक्त में क्रिकेट खेली। इसलिए पिछड़ गए। वही जाफर अब टीम इंडिया का सलेक्टर बनने में भी पीछे रहे गए हैं और वजह वही कि गलत वक्त पर फॉर्म भर दिया। अजीत अगरकर की जगह खाली हुई तो वसीम जाफर ने आवेदन दिया, लेकिन उनके बजाए दो टेस्ट खेले रमेश पोवार को चुना गया। वजह थी कि बीसीसीआइ प्रज्ञान ओझा को टीम इंडिया का चीफ सलेक्टर बनाना चाहती थी। इसके पीछे तर्क है कि ओझा के जरिए गौतम गंभीर और विराट कोहली में सुलह कराना है। यानी ढंग की टीम चुनने से कोई वास्ता नहीं है। हैरानी तो जाफर के फॉर्म भरने से हुई थी, क्योंकि ओझा के नाम पर मुहर के बाद चीफ सलेक्टर के लिए किसी ने भी फॉॅर्म नहीं भरा। जाफर ही थे, जिन्होंने हिमाकत की और इसीलिए उन्हें किनारे कर दिया, जबकि घरेलु क्रिकेट में बेहतरीन तजुर्बे के साथ कोचिंग का भी अनुभव है। विदर्भ में बच्चे तैयार कर रहे थे, लेकिन बीसीसीआइ को डर था कि जाफर आ जाएंगे तो सलेक्शन में मनमर्जी नहीं चलेगी। पोवार की जगह जाफर आते तो चीफ सलेक्टर होते, क्योंकि नियम है कि चारो झोन से चुने गए सलेक्टर में जो सबसे ज्यादा क्रिकेट खेला होगा, वही मुखिया बनेगा। जाफर के आते ही ओझा पिछड़ जाते तो पोवार को जूनियर सलेक्शन कमेटी से उठ

दीप्ति को सोना... भाला-फैंक में डबल मेडल

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दीप्ति को सोना... भाला-फैंक में डबल मेडल

भारत ने आज फिर मेडल की बारिश कर दी है। कल 11 पदक पर दिन खत्म किया था। सुबह आठ और जीत लिए हैं। जैवलिन में डबल पदल मिले हैं। दीप्ति जीवनजी ने दौड़ में कमाल किया है। दीप्ति ने 400 मीटर में सोना जीता है। 56.36 सेकंड में रेस पूरी कर जापान की नीना कन्नो से आगे रहीं। दीप्ति ने हीट्स में 57.57 सेकंड का नया एशियन पैरा गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया और फाइनल में और भी तेजी से रेस पूरी कर सोने के तमगे के साथ दिन की शुरुआत की। भाला फैंक में प्रदीप कुमार ने चांदी जीती तो आयुष वर्मा कांसा ले आए हैं। प्रदीप एफ54 कैटेगरी में 27.45 मीटर के थ्रो के साथ दूसरे नंबर पर रहे। आयुष ने एफ53 में 17.88 मीटर थ्रो के साथ तीसरा नंबर हासिल किया। पैरा टेबल टेनिस में सोनलबेन पटेल को सिंगल्स क्लास 3 और रवि बेबी सहाना को क्लास 9 में तांबा मिला है। प्रवीण शर्मा ने शॉट पुट में 13.86 मीटर थ्रो के साथ तांबा जीता है।

अच्छा खेलो या बाहर जाओ

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अच्छा खेलो या बाहर जाओ

इस्लामाबाद। फखर जमां ने बताया कि पाकिस्तान बोर्ड का दबाव है कि लडक़े आइसीसी ट्रॉफी लेकर आएं तो दूसरी तरफ शोएब अख्तर ट्राइ सीरिज शुरू होने से पहले बता रहे हैं कि बाबर आजम, शाहीन शाह अफरीदी को अल्टीमेटम दे दिया है कि या तो अच्छा खेल दिखाओ या फिर वन-डे क्रिकेट भूल जाओ। पाकिस्तान क्रिकेट बुरे दौर से गुजर ही है। एक तरफ खराब खेल और दूसरी तरफ हर वक्त लटकी तलवार। अख्तर ने खुलासा किया कि बाबर, शहीन, नसीम शाह, हारिस रऊफ और शादाब खान निशाने पर हैं। ट्राइ सीरिज में इन्होंने कुछ नहीं किया तो आखिरी बार वन-डे में उतरेंगे। पीसीबी ने बाहर करने का मना बना लिया है। टी-20 में पहले ही बाबर की छुट्टी हो चुकी है। लाल गेंद का क्रिकेट ही रह जाएगा।

यशस्वी का मनोबल तोड़ा

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यशस्वी का मनोबल तोड़ा

नई दिल्ली। पिछली सीरिज में यशस्वी जायसवाल को टीम के साथ रखा, पर ग्यारह में मौका नहींं दिया। न्यू जीलैंड दौरे पर तो पंद्रह से भी बाहर कर दिया। रविचंद्रन अश्विन इससे नाराज हैं। कह रहे हैं-इससे खिलाड़ी का मनोबल टूटता है। शुभमन गिल आखिरी दो वन-डे नहीं खेल रहे हैं। उनकी जगह यशस्वी को चुना जाना चाहिए था। गिल और केएल राहुल की हालत समझ आती है, लेकिन यशस्वी को तो खेलने को ही नहीं मिल रहा। कुछ वक्त पहले तक यशस्वी भारत की रन मशीन थे, लेकिन इन्हीं हरकतों की वजह से खेल में गिरावट आई है।

वैभव की अभी बारी नहीं आई

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वैभव की अभी बारी नहीं आई

बेंगलुरू। जापान में वीवीएस लक्ष्मण ने वैभव सूर्यवंशी को मैच दिए थे, लेकिन गौतम गंभीर ने घर पर उतारा नहीं। कप्तान श्रेयस अय्यर ने उसी वजह को आगे किया, जिस पर गंभीर अड़े हैं। कह रहे हैं कि संजू-अभिषेक की जोड़ी ने हमें विश्वकप जिताया है। इसलिए पहला हक उनका बनता है। वैभव को बारी का इंतजार करना पड़ेगा। लगातार अच्छा खेल दिखा रहे हैं। वैभग को खेलाने के लिए किसी को बैठा नहीं सकते।

दस में... सौ की आस!

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दस में... सौ की आस!

पिछली बार भारतीय पैरा खिलाडिय़ां ने पैरा एशियन गेम्स में 111 पदक जीते थे, जो रिकॉड था। इस बार दस खेलों में ही हिस्सा ले रहे हैं और उम्मीद है कि आंकड़ा तीन अंकों तक जाएगा। प्रमोद भगत, अवनी लेखरा, शीतल देवी और भाविना पटेल से फिर उम्मीद है कि कमाल दिखाएंगीं। सिमरन शर्मा लय में है। पेरिस पैरालिंपिक और विश्व पैरा एथलेटिक्स में पदक के बाद उनसे भी आस है कि तमगा मजबूत लाएंगी। आज से हफ्ते भर का टूर्नामेंट शुरू है।

शमी से मुंह फेरा, जाडेजा से काम निकाला

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शमी से मुंह फेरा, जाडेजा से काम निकाला

मोहम्मद शमी के लिए सलेक्टर तय कर बैठे हैं कि नहीं खेलाना है। भुवनेश्वर कुमार के लिए रास्ता बनाया जा सकता है तो शमी ने कौन सा गुनाह किया है। तेज गेंदबाजों के बुरे खेल के बाद सोचा जाना चाहिए था। टीम तय करने से पहले ही लाल गेंद से चार को चटकाया था। टेस्ट क्रिकेट में नहीं खेला सकते तो वन-डे में काम में लिया जा सकता है। रवींद्र जाडेजा से भी राम-राम कर ली है। पिछली सीरिज में ही वापस लेकर आए थे, लेकिन अक्षर पटेल की आमद के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया। अक्षर के बदल के लिए जाडेजा को रखा है। पचास ओवर विश्वकप तक यही चलना है। आकिब नबी को सफेद गेंद क्रिकेट खेलाना समझ से परे है। जगह पकड़कर फेंकने वाले गेंदबाज हैं, जो लाल गेंद के लिए ही सही है। सफेद में तो कुटाई होती है। रणजी ट्रॉफी में कमाल भी उसी के बूते किया था, लेकिन वहां अंशुल कंबोज को लिया है। अंशुल लगातार अच्छा खेल रहे हैं, लेकिन सलेक्टर को तय करना है कि कौन सफेद गेंद का गेंदबाज है और कौन सफेद कपड़ों का। मानव सुथार का टीम में नहीं होना चौंकाता है। जितने भी मैच मिले हैं, कमाल दिखाया है। काउंटी क्रिकेट में भी विकेट चटकाए हैं, लेकिन तवज्जो बल्लेबाजी में अव्वल स्पिनर को दी है। जाडेजा के साथ वाशिंगटन सुंदर को रखा है। कुलदीप यादव तीसरे स्पिनर हैं।