जाफर की टाइमिंग फिर खराब...!

· Indore

जाफर की टाइमिंग फिर खराब...!

वसीम जाफर घरेलु क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं, लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट में कमाल दोहरा नहीं पाए। जाफर के बारे में कहते हैं कि अमोल मजूमदार की तरह गलत वक्त में क्रिकेट खेली। इसलिए पिछड़ गए। वही जाफर अब टीम इंडिया का सलेक्टर बनने में भी पीछे रहे गए हैं और वजह वही कि गलत वक्त पर फॉर्म भर दिया।

अजीत अगरकर की जगह खाली हुई तो वसीम जाफर ने आवेदन दिया, लेकिन उनके बजाए दो टेस्ट खेले रमेश पोवार को चुना गया। वजह थी कि बीसीसीआइ प्रज्ञान ओझा को टीम इंडिया का चीफ सलेक्टर बनाना चाहती थी। इसके पीछे तर्क है कि ओझा के जरिए गौतम गंभीर और विराट कोहली में सुलह कराना है। यानी ढंग की टीम चुनने से कोई वास्ता नहीं है।

हैरानी तो जाफर के फॉर्म भरने से हुई थी, क्योंकि ओझा के नाम पर मुहर के बाद चीफ सलेक्टर के लिए किसी ने भी फॉॅर्म नहीं भरा। जाफर ही थे, जिन्होंने हिमाकत की और इसीलिए उन्हें किनारे कर दिया, जबकि घरेलु क्रिकेट में बेहतरीन तजुर्बे के साथ कोचिंग का भी अनुभव है। विदर्भ में बच्चे तैयार कर रहे थे, लेकिन बीसीसीआइ को डर था कि जाफर आ जाएंगे तो सलेक्शन में मनमर्जी नहीं चलेगी।

पोवार की जगह जाफर आते तो चीफ सलेक्टर होते, क्योंकि नियम है कि चारो झोन से चुने गए सलेक्टर में जो सबसे ज्यादा क्रिकेट खेला होगा, वही मुखिया बनेगा। जाफर के आते ही ओझा पिछड़ जाते तो पोवार को जूनियर सलेक्शन कमेटी से उठाकर यहां पटक दिया। ओझा इसलिए भी बीसीसीआइ की पसंद हैं कि यस मैन हैं। जो भी काम मिले, बखूबी निभाए। लाइन क्रॉस नहीं की। अगरकर से भी यही उम्मीद थी, लेकिन पुराने खिलाडिय़ों को ठिकाने लगाने के बाद बुराई उनके माथे फोड़ अलग कर दिया।

जाफर भी उसी तरह थे। मुखिया बनते तो बाहरी दखल पसंद नहीं करते और मुमकिन है कि जायज को मौका देते। मोहम्मद शमी की पैरवी करते रहे हैं। बनते तो वापसी हो जाती। गंभीर से इतर सोच इंटरव्यू में कई बार जाहिर कर चुके हैं।