आज तो सोना-चांदी बरस रहा...

· Indore

आज तो सोना-चांदी बरस रहा...

टीम इंडिया की जीत से ज्यादा चर्चा इस बात की है कि न्यू जीलैंड की इंटरनेशनल पिच पर गेंदबाजी का ऐसा जनाज़ा क्यों निकला! जब पांचों भारतीय गेंदबाज दस से ऊपर रन दे रहे तो समझो कप्तान का तरकश खाली था। फिलिप्स की तारीफ बनती है, पर हमारे गेंदबाजों ने भी उन्हें ऐसे चौके-छक्के परोसे जैसे फिलिप्स ससुराल में दावत उड़ा रहे हों।

यहां टीम और कप्तानी पर भी सवाल है। क्या गेंदबाज़ों का चुनाव पिच और विपक्षी बल्लेबाज़ों को ध्यान में रखकर किया था? जब रन बरस रहे थे, तब कप्तान ने फील्डिंग में बदलाव और गेंदबाज़ों के इस्तेमाल में क्या नया किया? हर गेंदबाज़ का पिटना उसकी गलती नहीं, कैप्टन की परीक्षा भी है।

बीच में विकेट गिरे तो मैच में जान आई, पर नमन धीर ने साबित कर दिया कि असली खिलाड़ी वही है, जो मौके पर चौका मारे। कीवी गेंदबाजी भी गली क्रिकेट से ऊपर नहीं उठ पाई। अजीब बात यह है कि कसी ग ेंदबाजी कर रहे नेथन स्मिथ को सिर्फ दो ओवर थमाए -साफ है, कीवी कप्तान का दिमाग कैच लेते समय गिरने से डगमगा गया था! फील्डिंग में भी कीवियों को हाथ-पाँव खुल नहीं रहे! टी-20 में ढीली फील्डिंग और गेंदबाज़ी की गलतियाँ बने-बनाए मैच का कचूमर निकाल देती हैं। टी-20 में बड़ा स्कोर दरअसल बड़ा मुगालता है, असली जंग तो डेथ अवर्स और फील्डिंग पर जीती जाती है। रन उन्होंने बनाए, बाजी हम ले उड़े!