कल डंका था... भारत के नाम का!

· Indore

कल डंका था... भारत के नाम का!

गुरुवार कमाल बीता है। जम्मू कश्मीर की उन्नीस साला शीतल देवी ने पैरा एशियन गेम्स में दो घंटे में दो सोने के तमगे जीत लिए तो रात में खबर आई कि अनाहत सिंह ने आठ बार की चैंपियन को हरा दिया है। इस बीच अश्मिता चलीहा ने अकाने यामागुची को चित कर दिया। नमन धीर की पारी ने इस पर तडक़ा लगा दिया।

शीतल की गोल्डन हैट-ट्रिक हो जाती, पायल नाग के साथ डबल्स में सोना चूक गईं। सिंगल्स में मुकाबला कड़ा था, लेकिन छह लगातार दस के स्कोर ने सोना गले में डाल दिया। मिक्स्ड डबल्स में भी वही काम किया। पेरिस ओलिंपिक में कांसा जीतने के बाद इस तीरंदाज का तोड़ नहीं है। पैरों से इतना सटीक निशाना लगाती हैं कि हमारे धनुर्धर हैरान रह जाएं।

अनाहत सिंह ने एशियन गेम्स में सतोमी वतानबे को हराया था तो जिंदगी की सबसे बड़ी जीत करार दी थी। नूर अल शेरबिनी को मात दी तो बोलने के लिए शब्द नहीं थे। आठ बार की विश्व चैंपियन को अठारह साल की अनाहत ने यूं चित कर दिया, जैसे रोज का काम हो। अनाहत कहती हैं कि शेरबिनी को देख कर ही बड़ी हुई हूं। एक मुकाबला नहीं छोड़ा। साथ खेलने को ही खुशनसीबी समझी थी, लेकिन सोचा नहीं था कि हीरो को हरा दू्ंगी। दोनों के कोच ग्रेगरी गॉल्टियर हैं, लेकिन उन्हें भी यकीन नहीं हो रहा कि अनाहत, शेरबिनी पर भारी पड़ी हैं।

अनाहत वाला कमाल अश्मिता ने भी दोहराया है। यामागुची को जीत-मशीन कहते हैं। आन से-यंग ही उन्हें हरा सकती हैं, लेकिन अश्मिता ने आसमान दिखा दिया। हफ्ते भर पहले दोनों की मुलाकात हुई थी तो अश्मिता को एकतरफा पटका था। मुकाबले से पहले पिता समझा रहे थे कि यामागुची पर ध्यान नहीं देना है। सिर्फ अपना खेल खेलना, लेकिन डरने के बजाए अश्मिता ने सामना करने की ठानी और पीवी सिंधू के बाद टॉप-2 को हराने वाली खिलाड़ी बन गईं। अश्मिता के लिए साल कमाल रहा है। शुरुआत की थी तो विश्व रैंकिंग में 94वें नंबर पर थीं और फ्रेंच ओपन आते-आते 38वें पर पहुंच गई हैं। यामागुची पर जीत बड़ी छलांग देकर जाएगी। बताती हैं कि जैसे ही तय हुआ की जीत गई हूं, तो कांपने लगी। एक दिन समझने में लगेगा कि आखिर हुआ क्या है।

लड़कियों के बीच नमन धीर का जिक्र बनता है। टीम इंडिया हार्दिक-हार्दिक जप रही थी, लेकिन हाथ नमन लग गए हैं। वाशिंगटन सुंदर की चोट ने ऑफ स्पिन डालने के लिए बुलाया था, लेकिन जैसे ही बल्ले से जौहर दिखाने को मिला तो ऐसा खेल दिखाया है कि हार्दिक को भुलाने का मन कर रहा है। नए हैं, लेकिन आते ही बता दिया है कि मुश्किल वक्त में अडऩा आता है। सुनील गावस्कर ने सही कहा है कि हार्दिक नहीं तो ना सही... नमन है।