ठहरी कांग्रेस...चलते दिग्विजय!

· Indore

ठहरी कांग्रेस...चलते दिग्विजय!

दिग्विजयसिंह फिर पैदल निकल पड़े हैं। उनकी यात्राओं से कांग्रेस भी आगे बढ़ती है या सिर्फ दिग्विजय सिंह चर्चा में आ जाते हैं? दिग्विजय गैर-राजनीतिक बता रहे हैं। इस यात्रा को भाजपा से धर्म की ठेकेदारी पर सवाल करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। उत्तरप्रदेश के उन हिस्सों से गुजरेगी जहां कांग्रेस को मेहनत करनी है, इसलिए धार्मिक पड़ावों के बीच पुराने कार्यकर्ताओं से मिलने और नए लोगों तक पहुंचने का मौका भी मिलेगा।

दिग्विजय बार-बार यात्रा क्यों करते हैं, इसका जवाब पैदल चलने के तरीके में भी छिपा है। बड़ी सभा में नेता बोलकर चला जाता है, पैदल यात्रा में उसे रुकना पड़ता है। गांव पास आ सकते हैं। नाराज कार्यकर्ता बात रख सकते हैं। पुराने साथी फिर जुट सकते हैं। नेता को भी पता चलता है कि जमीन पर कौन साथ है और कौन सिर्फ तस्वीर खिंचवाने आता है। दिग्विजय के लिए इसका फायदा सियासी पकड़ बनाए रखना भी हो सकता है। राजनीति में पुराने संपर्क हमेशा जिंदा नहीं रहते। उन्हें समय देना पड़ता है। यात्रा यह मौका देती है कि नेता फिर दिखे और पार्टी के अंदर उसकी जरूरत महसूस हो।

नर्मदा परिक्रमा सके बाद कांग्रेस ने उन्हें तालमेल बनाने का काम दिया। धार्मिक यात्रा के बाद कांग्रेस के काम में भी उनका इस्तेमाल हुआ। उसी बरस कांग्रेस मध्यप्रदेश में एक सौ चौदह सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी और पंद्रह बरस बाद सत्ता में लौटी। दिग्विजय की मेहनत उस जीत का हिस्सा थी, पर पूरा श्रेय उनकी परिक्रमा को देना बाकी तस्वीर मिटा देना होगा। कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया, उम्मीदवारों की मेहनत थी। भाजपा के लंबे शासन से नाराजगी भी थी। कोई ऐसा अलग हिसाब नहीं है जो बताए कि यात्रा से कांग्रेस को कितने वोट मिले।

इतनी बड़ी यात्राएं करने वाला नेता खुद लोकसभा नहीं पहुंच सका। राजगढ़ की हार में सुधार छिपा है। वहां 2019 में कांग्रेस हारी थी। दिग्विजय के लड़ने पर यह अंतर काफी कम हुआ, इसलिए यह कहना भी गलत होगा कि उनकी मेहनत का कोई असर ही नहीं हुआ। हां, इस सुधार में उनकी पहचान और रिश्तों का कितना हिस्सा था और प्रचार का कितना, इसका पक्का जवाब नहीं है।

अब सामने असली काम यात्रा के बाद शुरू होगा। जिन गांवों में स्वागत हुआ, वहां पार्टी का काम कौन संभालेगा, जिन लोगों ने शिकायत सुनाई, उनसे दोबारा कौन मिलेगा, जुटी भीड़ में से कितने चुनाव के दिन कांग्रेस के साथ होंगे? दिग्विजय के पैरों की मेहनत दिख रही है। कांग्रेस की मेहनत उनके लौटने के बाद दिखनी चाहिए, वरना अयोध्या तक दिग्विजय पहुंच जाएंगे और कांग्रेस वहीं खड़ी रह जाएगी।