ऐसे दुश्मन हों... तो दोस्त क्या करे!

भाजपा प्रचार में उस्ताद है... फिर चाहे विपक्ष का ही क्यों ना हो! देखिए ना, प्रियंका-पुत्र का नाम भी पता नहीं था इस देश की बड़ी आबादी को, भाजपा ने रातोंरात और दिनोंदिन कंठस्थ करा दिया। दिल्ली में रेहान वाड्रा की सभी तस्वीरों की नुमाइश लग भी जाती तो क्या फर्क पड़ जाता! गोदी-मीडिया को इशारे भर की जरूरत रहती है, कोई जिक्र भी नहीं करता। सरकार ने आधे से ज्यादा तस्वीरें, यह कहते हुए नुमाइश से हटवा दीं कि इससे सद्भावना का माहौल खराब होगा। कमाल यह कि रेहान वाड्रा की सभी तस्वीरें उस आंदोलन की हैं, जिसमें धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी। क्या ऐसा कोई दर्दनाक, हिंसक और क्रूर दृश्य बाकी है, जो रेहान की तस्वीरों में है, लेकिन सोशल मीडिया पर नहीं देखा गया। हजारों वीडियो बता रहे हैं कि आततायी सरकार ने कितना जुल्म किया है युवा पीढ़ी पर! लड़कियों को भी नहीं बख्शा गया, मारपीट की गई और बदतमीजी भी हुई! जो वीडियो में नजर आ रहा है, चीख-पुकार सुनाई दे रही है, रेहान के चित्रों में तो नजर नहीं आएगी, सुनाई नहीं देगी। फिर भी श्वेत-श्याम चित्रों से भाजपा का चेहरा लाल क्यों हुआ जा रहा है? ये डरी हुई सरकार आजकल रस्सी को भी सांप समझ लेती है।
जंतर-मंतर के चित्रों की नुमाइश से रेहान वाड्रा का जितना फायदा नहीं होता, भाजपा सरकार की अड़ंगेबाजी से होता नजर आ रहा है। यूं भी कह सकते हैं कि कांग्रेस की चाल में भाजपा फंस गई और नुमाइश से चित्र हटा कर यह साबित कर दिया कि उसे सिर्फ विरोध करना ही आता है। भाजपा के हाथ तो कुछ नहीं लगा, अब लोग यहां-वहां तलाश कर रेहान वाड्रा के चित्र देख रहे हैं। समझदार ने पहले ही कहा है कि तारीफ से, ना विरोध से, ज्यादा फायदा मिलता है... अनदेखी से! ऐसा करती भाजपा तो आज फायदे में रहती... कला-जगत की नसें नहीं तनतीं! अन्य राज्यों से रेहान वाड्रा को पीले चावल नहीं मिलते कि हमारे यहां आ जाओ, सभी चित्र लगाएंगे नुमाइश में!