कलाकार भी इंसान ही तो है!

दलेर मेहदी गाना नहीं गा पा रहे, क्योंकि नशे में हैं और इसीलिए उत्तराखंड के मंत्री उन्हें डपट रहे हैं। कई इस वीडियो को मजे-मजे से साझा कर रहे हैं, लेकिन इस भेड़चाल में सिक्के का दूसरा पहलू नहीं देख रहे। दलेर मेहदी अब उम्र के उस पड़ाव पर हैं, जहां वह सिर्फ यादों को जिंदा रखने के लिए गाते हैं।
शास्त्रीय संगीत वाले परिवार से आते हैं। संगीत के लिए महज ग्यारह बरस की उम्र में घर छोड़ दिया था। पटियाला घराने से ताल्लुक रखते हैं और राहत अली खान साहब की उन्होंने शागिर्दी की है। वैसे भी आजकल लगभग नब्बे फीसद कलाकार स्टेज पर ‘लिपंसिंक’ करते हैं, इसलिए उनसे अकेले में बात की जा सकती थी, लेकिन इधर तो उनके पीछे ही पिल पड़े हैं, मानो कभी बूढ़े ही नहीं होने वाले। सॉरी दलेर सर, यू आर ग्रेट। दलेर मेहदी नामी कलाकार हैं, उम्र अब साथ नहीं दे रही। शेर भी एक उम्र के बाद शिकार पकड़ नहीं पाता। ऐसे में कोई नेता किसी कलाकार की इज्जत की धज्जियां उड़ाता है, तब उस वक्त कलाकार में कैसी टीस उठती होगी!
माना कि दलेर सही नहीं कर पा रहे थे, वह नशा नहीं करते। उनकी बीमारी की बात सही लगती है। खैर, वजह जो भी हो, पर कलाकार स्वभाव से भावुक होता है, इसलिए यह शिकायत मंच के पीछे भी की जा सकती थी। कई कहेंगे की बीमार थे तो कार्यक्रम क्यों किया? ऐसे लोगों को शायद पता नहीं कि बड़े शो दो-तीन महीने तय हो जाते हैं तो किसी को कैसे भान होगा कि वह बीमार हो जाएगा? यदि ऐन वक्त पर कार्यक्रम रद्द कर दिया, तब भी कलाकार पर हावी हो जाएंगे कि तारीख दी ही क्यों? हमें इन सब बातों को अनदेखा नहीं करना चाहिए।