वृद्ध महिला के खेत पर सरकारी कब्जा...!

· Indore

गंगाबाई का खेत बन गया तालाब
गंगाबाई का खेत बन गया तालाब

खरगोन कलेक्टर कार्यालय सन्नाटे में है... मानों मातम हो। वजह है अस्सी साल की गंगा बाई की जमीन पर सरकारी कब्जा। मंडलेश्वर के पास नर्मदा किनारे पथराड़ खुर्द गांव में बरसों से खेती कर रही हैं। तीस साल पहले डूब में आने की वजह से एस कुमार्स ने जमीन ली थी, लेकिन बांध बना नहीं और खेती जारी रही।

कंपनी दिवालिया हो चुकी है। बैंकों ने न्यायालय में केस लगा रखा है, लेकिन चार माह पहले कलेक्टर-एसडीएम हैदराबाद की वशिष्ठा कंपनी के साथ अधिकारियों की फौज भेजते हैं, जो भारी-भरकम मशीनों से गंगा बाई के खेत को खोद डालते हैं। जाने किस मीठे के लालच में बिना भू-अर्जन, कब्जा प्रमाण पत्र, पंपिंग स्टेशन के लिए खोदाई तो करवा दी, पर अब गले की हड्डी बन गया है।

अपर कलेक्टर खरगोन प्रताप कुमार को महेश्वर जानापाव उद्वहन सिंचाई योजना के लिए भू-अर्जन का काम दे रखा है। ऑफिस जाने पर पता चला कि आए नहीं हैं। फोन पर बात की तो बोले, मेरे पास योजना का कोई भी काम नहीं है। जब प्रताप कुमार के रीडर से पूछा तो कहने लगा- योजना साहब ही देख रहे हैं।

प्रताप कुमार ने इस बारे में खरगोन एसडीएम सत्येंद्र बैरवा से बात करने के लिए कहा। बैरवा से पूछा तो बोले कि मालूम नहीं कि प्रताप कुमार ने उनका नाम क्यों लिया। मैं तो खरगोन एसडीएम हूं। मामला मंडलेश्वर का है तो वहां के एसडीएम ही बता पाएंगे।

मंडलेश्वर एसडीएम पूर्वा मंडलोई से बात की तो कहने लगीं मुख्यमंत्री का प्रोजेक्ट था। इसलिए कागजी कार्रवाई के बिना इजाजत दे दी। मंडलोई को जब बताया कि जमीन श्री महेश्वर हाइड्रा पॉवर वालों की है, जिसका न्यायालय में बैंकों से केस चल रहा है तो बोलीं कि किसानों को मुआवजा भले एस कुमार्स ने दिया था, लेकिन पैसा सरकार का था। इसलिए जमीन हमारी होने वाली है।

इसकी वजह पूछी तो कहने लगीं कि एनवीडीए के शिवहरे जी ने बताया है। उनकी ऊपर बात हो चुकी है। न्यायालय का फैसला हमारे हक में आने वाला है। बिना कागज काम शुरू करने का सवाल फिर पूछा तो बोलीं कि इसके लिए नियम है। जानकारी चाहिए तो शिवहरे से बात कर लो।

शिवहरे का बार-बार फोन और मैसेज करने पर भी जवाब नहीं आया। मंडलोई को फोन लगाया तो वो भी उठा नहीं रही हैं। एनवीडीए के इंजीनियर प्रतीक धबार्ड को लगाओ तो हर बार मीटिंग में बैठे रहते हैं। वशिष्ठा कंपनी के ऑफिस गए तो वहां काम करने वालों ने बताया कि भास्कर राव बाहर गए हैं। वही बता पाएंगे। राव को फोन लगाया तो जवाब नहीं दे रहे हैं।

ऊर्जा सचिव से मांगी मदद : बताते हैं कि किसानों और हिंदू महासभा, करणी सेना के विरोध के बाद कलेक्टर-एसडीएम ने ऊर्जा सचिव से जमीन दिलाने के लिए कहा है, लेकिन मामला न्यायालय में होने की वजह से सभी ने हाथ खड़े कर दिए हैं। कोर्ट से इजाजत लाना थी, लेकिन ना एस कुमार्स से बात की गई और ना उन बैकों से, जिन्होंने उगाही के लिए एस कुमार्स पर केस लगा रखा है।

काट दिए आम के पेड़ : नर्मदा किनारे कंपनी ने खेत के आसपास आम के पेड़ भी काट डाले। आठ से दस पेड़ों को नुकसान पहुंचाया है। वन-विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा। गांव वालों ने डंपर और पोकलैन रोक ली है। पुलिस को खबर कर दी है, पर कोई भी गांव तरफ झांक नहीं रहा है। ठेकेदार गांव वालों पर मशीने वापस करने का दबाव बनाता है। अफसर भी उसी का इंतजार कर रहे हैं कि ठेकेदार की गाड़ी फारिग हो जाए तो हाथ खड़े कर दें कि हमने किसी को नहीं भेजा था।