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खरीदी घोटाले का असर है कि अब अधिकार जाता रहेगा। जो सामान चाहिए… भोपाल खरीदेगा! मुख्यमंत्री ने जो कहा उसका सार यही है कि इनके भरोसे नहीं रह सकते। चार आने की चीज चार सौ रुपये में खरीदने का हल्ला पूरे देश में है। सोशल मीडिया के सारे प्लेटफार्म इससे भरे पड़े हैं। भ्रष्टाचार का देश में ताजा प्रतीक हो गए इस मामले ने मध्यप्रदेश की जमकर भद पिटा दी है। अब यह शंका भी मजबूत हो रही कि सरकार प्रदेशभर की खरीदी खुद करना चाहती थी… इस कारण उसने अपने ही बड़े अफसर से भंडाफोड़ कराया कि हमारी मजबूरी हो गई भोपाल से ही खरीदी करना। अब जो ‘प्रसाद’ हर जगह बंटता था, वह एक जगह अर्पण हो जाएगा। भोपाल में भी पहले इकट्ठा खरीद होती थी, कांग्रेस के जमाने में, तब के किस्से अब तक हवा में हैं।