जोर का फटका.. फल गया!

आयुषी भावसार ने गए साल विजय नगर के मॉल में पंद्रह सौ रुपये में मेहंदी बनवाई थी। इस बार खुद ही मॉल के पास मैदान में तंबू लगा लड़कियों और महिलाओं को मेहंदी लगा रही हैं। तीन दिन में सौ से ज्यादा के हाथ रच चुकी हैं। नेल आर्टिस्ट आयुषी को बीते साल मेहंदी के लिये लगे पंद्रह सौ रुपये के झटके ने काम का रास्ता दिखा दिया। सालभर में मेहंदी कलाकार भी बन गई। साथी लड़कियां विजय नगर के आईडीए मैदान पर दो दिन से तंबू लगा मेहंदी बना रही हैं। हाथ रचाने वालों को तलाशने नहीं जाना पड़ रहा है।
धूप के लिये तंबू है, बाकी खुला मैदान है, जहां चार-छह कुर्सियों पर बैठी महिलाओं और लड़कियों के हाथ रच रहे हैं। आयुषी बताती हैं कि मेहंदी पर खर्च करने में सोचते नहीं हैं। मेहनत और कलाकारी है। मोबाइल में जैसी डिजाइन दिखा रहे, वैसी मेहंदी बना रहे हैं। बताती है, जिन्हें हमने सिखाया साथ काम कर रही हैं। हमारी टीम में मुस्लिम लड़कियां भी हैं। इन की मांग ज्यादा है। बुर्के में ही काम कर रही हैं। दीवाली पर भी ऐसा ही तंबू लगाएंगे। देर रात तक काम कर रहे हैं। हमें मजा आ रहा है, शौक के साथ पैसा भी कमा रहे हैं।