छब्बीस तो पूरा हो गया!

कुर्सी की तलाश में घूम रहे इंदौर के भाजपा नेताओं ने मान लिया है कि छब्बीस में तो भला नहीं होगा और सत्ताईस में कब होगा, कोई गारंटी नहीं है। भोपाल की मीटिंग में निगम-मंडल के साथ दूसरे मामलों को लेकर बात तो हुई है, लेकिन मुख्यमंत्री ने कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है। पहले कैबिनेट फैलाव का जिक्र हो गया, जिससे निगम-मंडल तो जाते रहे हैं। छब्बीस में कैबिनेट हेरफेर हो, इस पर भी अगर-मगर ही है। यानी साल खत्म होने में जितने दिन बाकी हैं, उनमें इंदौर वालों का भला होता दिख नहीं रहा है। पहले दिवाली के बाद खुशियां देने की बात हुई थी और अब साल बदलने के बाद कुछ करने का जिक्र है।
वैसे इंदौरी नेता फिसड्डी ही रहे हैं कि निगम-मंडल में जगह नहीं मिली है। आईडीए बन नहीं रहा है, एल्डरमैन पर कोई बात नहीं करता है और बाकी जो कुर्सियां हैं, वो भी तंग कर दी गई हैं। अब नए साल का लड्डू उछाल दिया गया है और नेताओं ने फिर मुंह खोल दिया है!